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JNU : इंसानियत है भी या मर गयी ?

एक नौजवान जिसने दुनिया तो कभी नहीं देखी, पर देख लिया की ये दुनिया , वो दुनिया जिसे देखन को तड़प रहा होगा | रोज़ गुजारिश करता होगा ऊपरवाले से उसको क्या हक़ नहीं है इस दुनिया को देखने का? लेकिन आज उसने बिना आँखों के ही देख लिया की ये दिनिया कितनी जालिम हो सकती है या यूँ कह लो की टूट गया होगा उसका सपना इस दुनिया को देखने का, जी हाँ हम बात कर रहे है जवारलाल नेहरू विश्व विद्यालय के स्टूडेंट शशिभूषण की जिसको दिल्ली की पुलिस ने कुछ इस कदर पिटाई की आज वो ट्रामा में और दर्द से तड़प रहा है | आखिर क्या गलती थी उसकी?

आप सोच रहे होंगे दिल्ली पुलिस की इस मेहरबानी की वजह क्या है या कुछ महान लोगो के शब्दों में कह ले तो कोई न कोई गलती तो होगी उस नौजवान की, तो ये भी जान लीजिये की गुस्ताखी बस इतनी सी थी वो अपने हक़ की शिक्षा मांग रहा था|

क्या उसका अधिकार नहीं की उसेउचित मूल्य पर शिक्षा मिले, क्या वो इस सवा सौ करोड़ के देश से इतनी छोटी सी उम्मीद भी नहीं रख सकता ये बाद सिर्फ शशिभूषण की नहीं है बल्कि हर उस छात्र के लिए जो गरीबी से इतना मजबूर की चमचमाती हुए इमारतों में पढ़ने क लिए करोड़ो रुपये का बंदोबस्त नहीं कर सकता है. वो किसी किसान का बेटा हो सकता या किसी रिक्शे वाले का बेटा हो सकता या कोई अनाथ भी हो सकता है , सभी को हक़ है की उसको काम से काम उसके हक़ की सस्ती शिक्षा मिले, अब कहा चले गए वो वादें जिसमे हम अपने देश को ५ ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने वाले थे|

गौरतलब है की बीते कुछ दिनों पहले जवारलाल नेहरू विश्व विद्यालय में फीस के नए नियमो को लागु कर दिया गया नए नियमो के अनुसार फीस को ६००% तक बढ़ा दिया गया |
नए नियमो के मुताबिक एक बेड वाले रूम की कीमत २० रुपये से बढ़कर ६०० रुपये कर दी गयी जबकि २ बेड वाले रूम की कीमत १० रुपये से बधार ३०० रुपये कर दी गयी और १७०० रुपये का सर्विस चार्ज अलग से लिया जायेगा |
 फीस बढ़ने की पीछे सरकार का तर्क ये है कि पिछले ३ दसको में फीस में कोई इजाफ़ा नहीं हुआ है जबकि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फीस में आंशिक वृद्धि की जाती रही है, जिसके विरूद्ध सारे विद्यार्थी प्रदर्शन कर रहे है |

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