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सांड की आँख

सांड की आँख जिसे अंग्रेजी में कहत है बुल्स आई | सांड की आँख फिल्म हकीकत की देवरानी जेठानी की है प्रकाशी और चंद्रो तोमर की जिन्होंने निशानेबाज़ी की शुरुआत 60 साल की ज्यादा उम्र में की| ये देवरानी जेठानी रिवॉल्वर दादी और शूटर दादी के नाम से प्रचलित है इस उम्र में अक्सर लोग भगवान का नाम लेते है और अपने पोतों-पोतियों के साथ समय बिताते है, लेकिन शूटर दादी अपनी बेटी सीमा तोमर का भविष्य बनाने चली थी और उनका खुद का भविष्य बन गया|

शूटर दादी चाहती थी कि उनकी जिंदगी कि तरह उनकी बेटी कि जिंदगी न हो इसलिए वो अपनी बेटी सीमा तोमर को जोहर राइफल क्लब में दाखिला दिलवाया लेकिन सीमा तोमर अकेले जाने से डरती थी इसलिए शूटर दादी उनके साथ जाती थी, जब निशानेबाज़ी के समय सीमा तोमर का विश्वास डगमगाया तब शूटर दादी ने राइफल से निशाना सटीक लगाया|

दादी के इस निशाने ने सबको चौंका दिया और लोगो को और कोच को लगा कि ये तुक्के से हो गया तो कोच ने दादी को दोबारा निशाने दागने को कहा और दोबारा भी निशाना ठीक लगा | और जैसा की कहते है कि हीरे कि परख जोहरी को ही होती है, वैसे ही कोच ने शूटर दादी का हुनर पहचाना और एकेडमी में दाखिला लेने को कहा|
तो जैसे की इस उम्र में उन्हें दिक्कत हुई पर उन्होंने अपने बारे में सोचा और ट्रेनिंग लेनी लगी| और हमारी भारत के उत्तर प्रदेश की दोनों शूटर दादी ने 20 मेडल जीते|

वैसे तो हमारी दादी और नानी हमे कहानी सुना कर प्रेरित करती है और सिखाती है लेकिन इस बार दादी ने सिर्फ हमे ही नहीं बल्कि अपनी उम्र के लोगो को भी खुद की कहानी लिख कर प्रेरित किया है|

आप कितना प्रेरित हुए और क्या सीखा या क्या दिमाग में आया शूटर दादी की कहानी
पढ़कर हमे कमेंट करके जरूर बताये|

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